30 August 2017

शिक्षा के रूप,शिक्षा के प्रकार (Forms of Education)

शिक्षा के रूप (Forms of Education)

         वैसे तो शिक्षा के अनेक प्रकार हो सकते है लेकिन  शिक्षा प्राप्त करने तथा प्रदान करने के उद्देश्य ,विधि तथा स्वरूप के दृष्टिकोण से शिक्षा को तीन भागों में विभाजित किया गया है।

(1) औपचारिक शिक्षा (Formal Education)
(2) अनोपचारिक शिक्षा (Informal Education)
(3) निरोपचारिक शिक्षा (Non Formal Education)

शिक्षा के प्रकार,types of education,forms of education


(1) औपचारिक शिक्षा-(Formal Education)

             औपचारिक शिक्षा का तात्पर्य उस शिक्षा से है जो जान-बूझकर दी जाती है।औपचारिक शिक्षा प्रदान करने का सबसे महत्वपूर्ण स्थान विद्यालय है।विद्यालय द्वारा ही मातृ -भाषा,विज्ञान,गणित,भूगोल,इतिहास आदि विषयों की शिक्षा दी जाती है जो औपचारिक शिक्षा है।औपचारिक शिक्षा को प्रदान करने के लिए नियमित रूप से अभिकरण स्थापित होते है व पाठ्यक्रम बनाया जाता है।पाठ्यक्रम को पूरा करने के लिए सुनियोजित कार्यक्रम बनाए जाते है।जिसके आधार पर बालक शिक्षा ग्रहण करता है।अंत में छात्रों का मूल्यांकन किया जाता है।निजी ट्यूशन के द्वारा भी औपचारिक शिक्षा दी जाती है।
औपचारिक शिक्षा वह है जो जिसको पूर्व आयोजन,नियोजन व सम्प्रत्यंशील उपायो से प्रदान किया जाये।
औपचारिक शिक्षा के लिये उद्देश्य,पाठ्यक्रम,शिक्षण विधियों का भी सुनिश्चित आयोजन किया जाता है।
औपचारिक शिक्षा व्यवस्थित रूप से प्रदान की जाती है।

औपचारिक शिक्षा की विशेषताएँ-
    
  औपचारिक शिक्षा की निम्न विशेषताएँ होती है-
1.यह शिक्षा स्कूलों द्वारा प्रदान की जाती है।
2.औपचारिक शिक्षा में सुनियोजित व्यवस्था की आवश्यकता होती है।
3.औपचारिक शिक्षा अप्राकृतिक,कृत्रिम व जटिल होती है।
4.औपचारिक शिक्षा बहुत ही कष्टसाध्य है तथा परिश्रम चाहती है।
5.इस प्रकार की शिक्षा में निशिचत पाठ्यक्रम को निश्चित समय में पूर्ण किया जाता है।
6.यह शिक्षा जीवन पर्यन्त चलती रहती है।
7.औपचारिक शिक्षा भौतिक होती है।
8.औपचारिक शिक्षा के उदे्श्य सुनिष्श्चित होते है।


(2) अनोपचारिक शिक्षा(Informal Education)-

       विद्यालयों में बालक केवल कुछ ही विषयो का ज्ञान प्राप्त कर पाते है।पढ़ना,लिखना या ज्ञान प्राप्त करना ही शिक्षा नही है।शिक्षा विस्तृत व व्यापक है।
हम अपने अच्छे व बुरे अनुभवो व ज्ञानेन्द्रयो के अनुभव से शिक्षा ग्रहण करते है।शिक्षा सभी प्रकार के अनुभवों का योग है।जिसे मनुष्य अपने जीवन काल में प्राप्त करता है।
औपचारिक साधनों के द्वारा जो शिक्षा प्राप्त होती है,वह 'औपचारिक शिक्षा' कहलाती है। तथा जो शिक्षा अनोपचारिक साधनों से प्राप्त होती है वह अनोपचारिक शिक्षा कहलाती है।

अनोपचारिक शिक्षा की विशेषताये-Characterization of informal education-

 1.अनोपचारिक शिक्षा के लिए किसी व्यवस्था की आवश्यकता नही पड़ती है।
2.अनोपचारिक शिक्षा स्वाभविक,सरल तथा प्राकृतिक रूप में होती है।
3.अनोपचारिक शिक्षा प्राप्त करने के लिए विद्यालयो की आवश्यकता नही हैं।
4.अनोपचारिक शिक्षा चारो और के वातावरण ,परिवार,समाज व पड़ोस आदि से प्राप्त होती है।
5.अनोपचारिक शिक्षा मानव की मूल परवर्तियों तथा उसकी रुचि पर निर्भर करती है।
6.यह शिक्षा जन्म से मृत्यु तक चलती है यह जीवन पर्यन्त चलने वाली प्रक्रिया है।



3.निरोपचारिक शिक्षा (Non Formal Education)-

      औपचारिक व अनोपचारिक शिक्षा की कमियों को देखते हुए शिक्षा का एक नया रूप विकसित किया गया है जो न तो पूरी तरह औपचारिक शिक्षा के समान बन्धनयुक्त,व्यवस्थित,कृत्रिम तथा अव्यवहारिक ही था और न अनोपचारिक शिक्षा के समान पूर्व स्वाभविक,मुक्त,तथा प्राकृतिक ही था।यह शिक्षा का नया स्वरूप दोनों शिक्षा का मिला जुला रूप था जिसे ' निरोपचारिक शिक्षा' के नाम से जाना जाता है।
निरोपचारिक शिक्षा में बंधनो के साथ-साथ स्वतंत्रता भी होती है इसमें शिक्षा का एक निश्चित कार्यक्रम रहता है।लेकिन वह स्थान,वातावरण,वर्ग,उम्र आदि के बंधनों से मुक्त रहता है।

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