विज्ञान शिक्षक के गुण-Quality of Science Teacher-

एक अच्छे विज्ञान शिक्षक में निम्न गुण होने चाहिए-
1. विषय का ज्ञान knowledge of the subject-
 
विज्ञान के शिक्षक को अपनी विषय का पूर्ण ज्ञान होना चाहिए तभी वह अपने छात्रों के साथ पूर्ण न्याय कर सकता है।विज्ञान के ज्ञान के साथ ही उसे भौतिक विज्ञान,रसायन विज्ञान आदि का विस्तृत ज्ञान होना चाहिए। वह जीवन पर्यंत विद्यार्थी जीवन ही व्यतीत करें ।यदि वह इस जीवन का त्याग करता है तो राष्ट्र,छात्र तथा अपने स्वयं के हित में कुठाराघात करेगा।
साथ ही वह विद्यार्थियों को उनके कर्तव्य तथा अधिकारों का ज्ञान सफलता के साथ नहीं दे सकता है क्योंकि जब तक उसे निर्णायक एवं कठिन क्षणों का ज्ञान नहीं होगा तब तक वह उनको भावी जीवन में आने वाले क्षणों के लिए तैयार नहीं कर सकता और उनके कर्तव्यों को नहीं बता सकता कि ऐसे समय पर उनका क्या कर्तव्य है।

2. व्यावसायिक गुण-Professional property
        बालक बहुत कुछ शिक्षक के कार्य,दर्शन आदि से सीखता है जैसा शिक्षक का दर्शन होगा वैसा ही बालक अपना जीवन में दर्शन बनाने की चेष्टा करेगा इसी कारण शिक्षक को आशावादी बनने के लिए कहा गया है।शिक्षक का जो दृष्टिकोण शिक्षण कार्य के प्रति होगा वैसा ही उसके बालको पर उसका प्रभाव पड़ेगा। निष्ठा सीखने की प्रक्रिया को प्रोत्साहित करती है इसलिए उसे अपने व्यवसाय तथा विषय दोनों में पूर्ण निष्ठा होनी चाहिए।
यदि वह ऐसा नहीं करेगा तो अपने छात्रों के व्यक्तित्व को विकसित नहीं कर पाएगा जो कि शिक्षा का मुख्य लक्ष्य है। इसलिए विज्ञान के शिक्षक को अपने कार्य को उत्साह तथा तत्परता से करना चाहिए ऐसा करने से छात्र में विद्या के लिए अनुराग उत्पन्न कर सकता है भारतीय शिक्षको में निष्ठा की कमी होती है तभी हमारी शिक्षा का स्तर दिन प्रतिदिन की ताजा रहा है या सकते हैं कि शिक्षकों को समय व्यक्ति जैसा जीवन व्यतीत करना पड़ता है जबकि से कम योगिता वाले व्यक्ति एश्वर्या पूर्ण जीवन व्यतीत करता है। शिक्षक ने जब कोई व्यवसाय ग्रहण कर लिया है तब उनके लिए यह अनिवार्य है कि वे सकते निष्ठ होकर अपने कार्य को रुचि तत्परता तथा उत्साह के साथ करें क्योंकि वे ही राष्ट्र के निर्माता है।

3. वैज्ञानिक दृष्टिकोण-scientific approach
        इस पर का गुण केवल विज्ञान शिक्षकों के लिए ही आवश्यक है।आधुनिक युग में वैज्ञानिक प्रवति यह तकाजा है कि उसी तथ्य या बात को ग्रहण किया जाए जो प्रमाण युक्त तथा तर्कसमत हो।
इस कारण विज्ञान के शिक्षक को वैज्ञानिक दृष्टिकोण का होना भी परम आवश्यक है यदि उसका वैज्ञानिक दृष्टिकोण नहीं होगा तो वह अपने छात्रों में इस दृष्टिकोण को उत्पन्न नहीं कर सकेगा जो कि उनके लिए अत्यंत आवश्यक है क्योंकि वही भावी नागरिक हैं जो आगे चलकर देश तथा समाज की स्थापना का भार अपने कंधो पर लेंगे।
यदि छात्रों में वेज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास नहीं किया जाएगा तो वह सफल सामाजिक जीवन व्यतीत करने में असमर्थ रहेंगे और समाज के संघर्षो,अहितो,तथा कलह को भी दूर नही कर सकेंगे। इसके साथ ही विज्ञान की शिक्षक में उदार दृष्टिकोण का होना भी अनिवार्य है।
इस दृष्टिकोण से वह अपने छात्रों में विनम्रता, सहानुभूति,प्रेम आदि गुणों का विकास कर सकता है।यदि उसमें इस दृष्टिकोण का अभाव रहेगा ।तो वह मानव-समाज का कल्याण करने में असमर्थ रहेगा तथा अपने छात्रों में विश्वबंधुत्व की भावना उत्पन्न नहीं कर सकेगा। अतः विज्ञान के शिक्षक में उधार दृष्टिकोण का होना अति आवश्यक है।

4. आदर्श नागरिक-Ideal citizen
   विज्ञान का शिक्षक एक आदर्श नागरिक हो, अथार्थ उसमें आदर्श नागरिकता के गुणों का समावेश हो ओर वह उसके अनुसार आचरण करता हो।उसे नागरिक के कर्तव्य तथा अधिकारों का पूर्ण ज्ञान हो। इसके साथ ही वह उनके के अनुसार आचरण करके अपने छात्रों का समाज के समक्ष एक आदर्श प्रस्तुत करें,दूसरे मनुष्यों के अधिकारों को सम्मान की दृष्टि से देखें तथा समाज में सहयोग, सहकारिता, प्रेम, सत्यनिष्ठा का तथा उत्साह के साथ कार्य करें। जाति,उपजाति एवं वर्गो से युक्त हमारे समाज में विज्ञान शिक्षक में सहिष्णुता,धैर्य, सहानुभूति मानवोके प्रति उदारता एवं दया, लोकतंत्र दृष्टिकोण आदि गुणों का होना आवश्यक है।

5. नई वैज्ञानिक घटनाओं का ज्ञान-Knowledge of new scientific events
          विज्ञान के शिक्षक को समाज की आधुनिकतम वैज्ञानिक घटनाओं से अवगत रहना आवश्यक है। इनके ज्ञान के अभाव में वह अपने छात्रों की रूचि विषय के प्रति जागृत नहीं कर पाएगा।इनके ज्ञान के अभाव में वह विद्यार्थियों की वेज्ञानिक समस्याओं पर होने वाले वाद विवाद में नेतृत्व भी नहीं कर पाएगा। इनके ज्ञान से वह छात्रों को समाचार पत्र,जनरल आदि को पढ़ने के लिए भी प्रोत्साहित कर सकता है।

6.सामाजिक गुण-social skill
        विज्ञान का शिक्षक पाठ्यक्रम निर्माण करता होता है उसे इस कर्तव्य को पूरा करने के लिए समाज की और ध्यान देना पड़ता है। उसे अपनी पाठ्य सामग्री तथा उद्देश्य समाज से लेने पड़ते हैं। इस कारण उसका यह मुख्य कर्तव्य हो जाता है कि वह इन उद्देश्यों की प्राप्ती करें।इन उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए उसमें सामाजिक सक्रियता का होना आवश्यक है।उसे समाज की सेवा करनी चाहिए इसलिए उसे स्थानीय तथा प्रादेशिक सामाजिक कार्य में पूर्ण सक्रियता के साथ भाग लेना चाहिए। और उनका नेतृत्व ग्रहण करने में सफल बनाने का प्रयत्न करना चाहिए।उसको सामाजिक तथा नीति कार्य में पूर्णतया क्रियाशील रहकर भाग लेना चाहिए और समाज के समक्ष सहयोग,सहकारिता, न्यायप्रेम,सहानुभूति आदि गुणों को अपने व्यवहार मे लाकर आर्दश प्रस्तुत करना चाहिए जिससे छात्र भी उसी के अनुसार कार्य करना सीखें।

7. व्यक्तित्व-Personality
        शिक्षक का व्यक्तित्व ही सफल शिक्षण की आधारशिला है।विज्ञान के शिक्षक की व्यक्तित्व में निम्न लिखित गुणों का होना अनिवार्य है जिनमें कुछ निम्न है-
जीवन शक्ति,अच्छा स्वास्थ्य,सत्य आचरण, शुभचिंतक,आशावादीता,निष्पक्षता,धैर्य, मौलिकता, सहयोग,सहनशीलता,प्रेम,आत्म नियंत्रण,विशाल सह्रदयता,तत्परता,उत्साह,निष्ठा आदि।
    विज्ञान के  शिक्षक में किसी वस्तु या तथ्य को रोचक ढंग से वर्णन करने की शक्ति होनी चाहिए,जो शिक्षक अपने तथ्यों को अपने कथन या तथ्य द्वारा सफलता के साथ अपने छात्रों के समक्ष क्रमबद्धता से रख सकता है वह अपने छात्रों के मस्तिष्क पर प्रभाव डाल सकता है।

8. मानवीय संबंधता का गुण-Quality of Human Relationship:
       विज्ञान मानवीय संबंधों का एक अध्ययन है।अतः इसके शिक्षक को मानवीय संबंधों का एक विशेषज्ञ होना चाहिए।उसे विद्यालय में छात्रों,अपने साथी शिक्षको, अभिभावकों,विद्यालय के कर्मचारियों,विद्यालय प्रशासको, समुदाय, खेलकूद के समान विक्रेता, व्यवसायिक संगठनों आदि से संबंध स्थापित करने पड़ते हैं।अतः उसका मानवीय संबंध स्थापित करने की कला को जानना परम आवश्यक है।


9. विज्ञान के शिक्षण का ज्ञान-Knowledge of teaching of science
       विज्ञान के शिक्षक के लिए प्रशिक्षित होना अत्यंत आवश्यक है।यदि उसको प्रशिक्षण नहीं मिलेगा तो वह आधुनिक शैक्षिक विचारधारा तथा विविध नवीन शिक्षण पदत्तियो से अपने को अवगत नहीं कर सकेगा।किस स्तर पर किस शिक्षण विधि का प्रयोग करना उचित होगा ऐसी बातों को जानना एक शिक्षक के लिए बहुत आवश्यक है शिक्षण के सामान्य सिद्धांत तथा नियम है जिनको प्रत्येक शिक्षक को जानना आवश्यक है।इन सिद्धांतो तथा नियमों का ज्ञान देने के लिए शिक्षक को प्रशिक्षित करना चाहिए।

10. शिक्षण की स्वतंत्रता Freedom of instruction
          विज्ञान के शिक्षक को विभिन्न समस्याओं, वाद-विवाद प्रकरणों तथा विषयों का शिक्षण करना पड़ता है।इसके लिए उसे शिक्षण की स्वतंत्रता की आवश्यकता है।उसे छात्रों को सत्य विषय-वस्तु तथा तथ्यों को ग्रहण करना ही सिखाना है।इसके लिए उसे अपने तथ्यों का विश्लेषण तथा संश्लेषण निष्पक्षता से करना पड़ेगा।यह तभी हो सकेगा जब उसको भेद, स्वार्थ-नीति आदि में ग्रसित नहीं किया जाएं। शिक्षण की स्वतंत्रता व्यावहारिक योग्यता से ही प्राप्त की जा सकती है।स्कूल ही एक ऐसा स्थान है जहां छात्र निष्पक्ष रुप से सत्य की खोज कर सकता है।