30 January 2018

शिक्षण विधियां-प्रदर्शन विधि Demonstration method-teaching methods

शिक्षण विधियां Teaching method

प्रदर्शन विधि demonstration method

साइंस को केवल व्याख्यान विधि द्वारा पढ़ाना पर्याप्त नहीं है। क्योंकि विज्ञान एक व्यावहारिक सब्जेक्ट है। विज्ञान के क्षेत्र में प्रयोग प्रदर्शन विधि का काफी महत्व है। प्रदर्शन विधि में छात्र एवं शिक्षक दोनों की सक्रिय रहते हैं। कक्षा में शिक्षक सिद्धांतिक भाग का विवेचन करने के साथ इस विधि द्वारा उसका सत्यापन करता है। शिक्षक पढ़ाते समय प्रयोग करता जाता है तथा छात्र प्रयोग प्रदर्शन का निरीक्षण करते हुए ज्ञान प्राप्त करते हैं। छात्र आवश्यकता अनुसार अपनी संकाय बी शिक्षक के सामने रखते हैं।
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प्रदर्शन विधि का अर्थ-Meaning of display method

     प्रदर्शन विधि वह शिक्षण विधि है जिसमें किसी संरचना, कार्य प्रणाली तथ्य तथा दृश्य को स्पष्ट किया जा सकता है। इस विधि में छात्र इंद्रियों की सहायता से जटिल प्रक्रिया का सरलता से बोध करते हैं। इस विधि द्वारा शिक्षण करने पर मूर्त से अमूर्त शिक्षण का अनुसरण किया जाता है। प्रदर्शन विधि में अध्यापक कक्षा में चार्ट, मॉडल का आयोजन करके संबंधित विषय वस्तु का स्पष्टीकरण करता है।
उदाहरण--यदि कक्षा में शिक्षक को पोटेशियम परमैंगनेट से ऑक्सीजन बनाने की विधि का प्रयोग प्रदर्शित करना है तो वह प्रदर्शन विधि का प्रयोग कर सकता है तथा इसके साथ ही वह अन्य प्रयोग जैसे-विभिन्न प्रकार के पुष्प, विभिन्न प्रकार के बीच, जड़ों द्वारा पानी सूखना आदि।

प्रदर्शन विधि को प्रस्तुत करने हेतु सावधानियां-

       अध्यापक को प्रदर्शन विधि से कार्य करने के समय कुछ सावधानियों को अवश्य अपनाना चाहिए जो निम्न प्रकार है-
प्रदर्शन ऐसी जगह पर करें जहां सभी विद्यार्थियों को स्पष्ट दिखाई देना चाहिए।
1.अध्यापक को साधारण उपकरण काम में लेने चाहिए।
2.प्रदर्शन ऐसी जगह पर करना चाहिए जहां पर्याप्त प्रकाश हो।
3.पाठ की आवश्यकता के अनुरुप ही प्रदर्शन प्रस्तुत करें।
4.प्रदर्शन द्वारा कोई बिंदु या संप्रत्यय स्पष्ट होना चाहिए।
5.प्रदर्शन इस प्रकार का होना चाहिए जिसमें छात्र रुचि ले सके।
6.प्रदर्शन के समय अध्यापक को व्याख्यान के साथ प्रदर्शन करना चाहिए।
7.प्रदर्शन में छात्र को बंद कर सकने तथा सिद्धांत से संबंध स्थापित करने के लिए पर्याप्त समय देना चाहिए।
8.प्रदर्शन में शिक्षकों और विद्यार्थियों का दृष्टिकोण अन्वेषणात्मक रहना चाहिए।
9.प्रयोग तथा वस्तुओं के प्रदर्शन को अधिक प्रभावशाली बनाने के लिए महत्वपूर्ण सहायक साधनों का प्रयोग करना चाहिए जैसे-ब्लैक बोर्ड, चार्ट, चित्र, फोटोग्राफ, मॉडल, सिनेमा रील, स्लाइड आदि।


प्रदर्शन विधि के लाभ-Performance method benefits-

प्रदर्शन शिक्षण विधि के निम्न लाभ होते हैं।
1.अधिक कठिन प्रयोगों व जोखिम भरे प्रयोगों को प्रदर्शित किया जा सकता है।
2.इस विधि से शिक्षण कार्य करवाने पर समय कम लगता है।
3.बालकों की दृष्टि एवं श्रवण इंद्रियां अधिक सक्रिय रहती है।
4.प्रदर्शन विधि के दौरान छात्र स्वयं देखकर सीखते हैं।
5.यह शिक्षण विधि छोटी कक्षाओं के लिए अधिक उपयोगी विधि है।
6.प्रयोग प्रदर्शन शिक्षक द्वारा किए जाने से उपकरणों की टूट-फूट कम होती है।
7.उपक्रमों की संख्या में कमी होने पर भी शिक्षण प्रभावशाली होता है।
8.छात्रों की निरीक्षण, तर्क एवं विचार शक्ति का विकास होता है।
9.इस विधि से प्राप्त ज्ञान अधिक स्थाई होता है।
10.छात्र इस विधि के सिद्धांतों को स्पष्ट रुप से समझ सकते हैं।


प्रदर्शन विधि के दोष-Performance method blame-

Performance method limits
प्रदर्शन विधि की सीमाएं-
1. इस शिक्षण विधि से सभी विद्यार्थियों को स्वयं प्रयोग करने का मौका नहीं मिलता।
2.यदि प्रदर्शन काफी जटिल हो तो विद्यार्थियों को मूल धारणाओं, सिद्धांतों तथा कौशलों को समझने में कठिनाई होती है।
3.इस शिक्षण विधि में बच्चे प्रयोगशाला की विभिन्न लाभों से वंचित रह जाते हैं जैसे उपकरणों तथा पदार्थों का संचालन करना तथा स्वयं व्याख्या करना आदि।
4.समय की कमी के कारण प्रदर्शन शीघ्रता से किया जाता है जिससे उसके विभिन्न सोपानों को साधारण छात्र नहीं सीख पाता।
5.बड़ी कक्षा में प्रदर्शन के समय सभी छात्रों को प्रदर्शन को ठीक से देख पाना प्राय संभव नहीं है।
6.शिक्षण का प्रमुख सिद्धांत 'करो और सीखो' है जबकि यह विधि देखो,सुनो और समझो के सिद्धांत पर ही आधारित है।
7.इस शिक्षण विधि द्वारा विज्ञान के सामान्य ज्ञान का ही प्रदर्शन हो सकता है।
8.कभी-कभी शिक्षक द्वारा प्रयोग सफल नहीं होता तो छात्रों के मन में विषय के प्रति अनेक भ्रांतियां उत्पन्न हो जाती है।

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