01 March 2018

व्यक्तित्व का अर्थ,व्यक्तित्व की परिभाषाएं और व्यक्तित्व को प्रभावित करने वाले कारक Definitions of personality

व्यक्तित्व- personality

व्यक्तित्व का अर्थ-Meaning of personality

सामान्य अर्थ में व्यक्तित्व से तात्पर्य शारीरिक रंग- रुप ,वेश -भूषा, सामान्य बातचीत के ढंग तथा कार्य व्यवहार से लगाया जाता है।
व्यक्तित्व शब्द के अंग्रेजी पर्याय personality का शाब्दिक अर्थ भी व्यक्तित्व के बाहरी गुण या बाहरी आचरण की ओर इशारा करता है।
अंग्रेजी शब्द personality शब्द लैटिन भाषा के शब्द पर्सोना(Parsons) से बना है जिसका अर्थ मुखोटा है।
पर्सोना शब्द का अभिप्राय उस पहनावें या वेषभूषा से था जिसे पहनकर नाटक के पात्र रंगमंच पर किसी अन्य व्यक्ति का अभिनय करते थे।अतः personality शब्द का शाब्दिक अर्थ व्यक्ति के बाहरी दिखावे मात्र को इंगित करता है।
व्यक्तित्व शब्द का अर्थ एक संकुचित अर्थ है आधुनिक संदर्भ में व्यक्तित्व एक अत्यंत व्यापक शब्द है तथा मनोविज्ञान की दृष्टि से इसका वास्तविक अर्थ के परंपरागत शाब्दिक अर्थ में प्रयाप्त भिन्न है
Psychologist की दृष्टि से personality एक अत्यंत जटिल तथा अस्पष्ट प्रकृति वाला प्रत्यय है जिसकी सर्वमान्य एवं पूर्णतया यथार्थ एवं स्पष्ट परिभाषा देना मैं केवल कठिन बल्कि लगभग असंभव सा कार्य है मनोविज्ञान के साहित्य में व्यक्तित्व शब्द की अनेक definitions मिलती है।
तथा उनमें पर्याप्त विभिन्नताएं पाई जाती है। व्यक्तित्व की यह सभी परिभाषाएं किसी एक मत पर सहमत नहीं हो पाती है। वास्तव में व्यक्तित्व एक ऐसी अपरोक्ष विशेषता है जिसे विभिन्न मनोवैज्ञानिकों ने अपने अलग अलग ढंग से देखा तथा परिभाषित किया है।

व्यक्तित्व की परिभाषाएं-Definitions of personality


वुडवर्थ के अनुसार--"व्यक्तित्व व्यक्ति के व्यवहार की एक समग्र विशेषता है।"
गिलफोर्ड के अनुसार-"व्यक्तित्व गुणों का समन्वित रूप है"
ड्रेवर के अनुसार-"व्यक्तित्व शब्द का प्रयोग व्यक्ति के शारीरिक,मानसिक, नैतिक और सामाजिक गुणों के उस एकीकृत तथा गत्यात्मक संगठन के लिए किया जाता है जिसे व्यक्ति अन्य व्यक्तियों के साथ अपने सामाजिक जीवन के आदान-प्रदान में व्यक्त करता है।"
बिग तथा हंट के अनुसार-"व्यक्तित्व किसी व्यक्ति के संपूर्ण व्यवहार प्रतिमान इसकी समस्त विशेषताओं के योग को व्यक्त करता है।"
आलपोर्ट के अनुसार-"व्यक्तित्व व्यक्ति के अंदर मनोशारीरिक गुणों ka गत्यात्मक संगठन है जो वातावरण के साथ उसका एक अनूठा समायोजन स्थापित करते हैं"
आलपोर्ट के द्वारा दी गई व्यक्तित्व की परिभाषा मनोविज्ञान में सर्वाधिक मान्यता प्राप्त है यह व्यक्तित्व के संबंध में तीन प्रमुख बातों की ओर संकेत करती है।
1. व्यक्तित्व की प्रकृति संगठनात्मक तथा गत्यात्मक है।
2. व्यक्तित्व में मनो तथा शारीरिक दोनों ही प्रकार के गुण समाहित रहते हैं।
3. व्यक्तित्व वातावरण के साथ समायोजन से अभी लक्षित होता है।
व्यक्तित्व का अर्थ-Meaning of personality


व्यक्तित्व को प्रभावित करने वाले कारक Factors That Affect Personality-

किसी भी व्यक्ति का व्यक्तित्व है दो प्रकार के करको से प्रभावित होता है।
 जैविकीय कारक तथा वातावरणीय कारक

1. जैविकीय कारक-1. Biological factors

  प्रत्येक व्यक्ति एक अनूठी शारीरिक रचना के रूप में जन्म लेता है। जन्म के समय वह अनेक शारीरिक विशेषताओं से युक्त होता है जो उसके व्यक्तित्व का एक महत्वपूर्ण पक्ष बनाती है। इन physical गुणों की वजह से वह व्यक्ति जन्म से लेकर मृत्युपर्यंत अन्य लोगों भिन्न से रहता है।
   व्यक्ति का रंग रूप, कद काठी, भार तथा स्वास्थ्य काफी सीमा तक जन्म के समय ही वंशानुक्रम के द्वारा निर्धारित हो जाते हैं।
   व्यक्ति का स्नायुमंडल तथा अंत स्रावी ग्रंथियां ( endocrine glands) भी उसके व्यक्तित्व के विकास को प्रभावित करती है।
   लिंगभद, बुद्धि, मूल प्रवृत्तियां, विशिष्ट योग्यताएं जैसी जैविकीय कारक भी व्यक्तित्व के विकास पर प्रभाव डालते हैं।

2. वातावरणीय कारक environmental factors-

   वातावरण को दो भागों में बांटा जा सकता है-
1. भौतिक वातावरण(physical environment)      2. सामाजिक वातावरण (social environment)
✓भौतिक वातावरण के अंतर्गत जलवायु,भूमि,कृषि, भौतिक संसाधन आते हैं। भौतिक वातावरण के कारण व्यक्ति की कद काठी, रंगरूप, स्वास्थ्य, रहन-सहन की आदतों में काफी अंतर आ जाता है।
✓सामाजिक वातावरण से तात्पर्य व्यक्ति को उपलब्ध सामाजिक अंतर्क्रिया(Social interaction) की गुणवत्ता तथा संभावना से है।


1. परिवार family-
   परिवार के विभिन्न सदस्यों के व्यक्तित्व तथा उनकी परस्पर अंतर्क्रिया का बालक के व्यक्तित्व पर जन्म से ही प्रभाव पड़ना प्रारंभ हो जाता है। बालक जन्म से ही एक सामाजिक प्राणी होता है तथा सबसे पहले वह अपने परिवार जनों के संपर्क में आता है। माता पिता, भाई बहन तथा अन्य परिवारजनों आदि के द्वारा की जाने वाली क्रियाओं लाड प्यार,तिरस्कार, दुलार, ईर्ष्या द्वेष आदि का प्रभाव बालक पर पड़ता है। परिवार में कलह होने या परिवार की संघर्षपूर्ण जीवन शैली तथा परिवारजनों की प्रवृतियां, महत्वाकांक्षा, रुचि, दृष्टिकोण, क्षमता, तथा आर्थिक सामाजिक व शैक्षिक स्थिति आदि (Lifestyle and lifestyle of families, ambition, interest, attitude, ability, and economic social and educational status etc.)भी बालक के व्यक्तित्व के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है

2. आस पड़ोस-
    जैसे-जैसे बालक का विकास होता जाता है उसका सामाजिक दायरा बढ़ता जाता है सामाजिक अनुकरण के द्वारा वह अनेक बातें सीखता है। साथियों के साथ खेल-खेल में बालक अनुशासन,आत्मविश्वास नेतृत्व ,वाक कौशल सामाजिकता (Discipline, self-confidence leadership, vocal skills, socialism)जैसे अनेक गुण सीख लेता है।

3. आर्थिक स्थिति economics condition-
    परिवार की आर्थिक स्थिति काफी बालक के व्यक्तित्व के विकास पर प्रभाव पड़ता है।आर्थिक दृष्टि से कमजोर परिवार के बच्चों में हीन भावना तथा भगनाशा उत्पन्न हो जाती है। गरीब परिवार के बच्चे परिस्थितिजन्य कारणों की वजह से चोरी, झूठ बोलना, चरित्र पतन तथा अन्य अनेक अनैतिक कार्यों के शिकार हो जाते हैं।

4. विद्यालय School-
   विद्यालय को personality के विकास का एक औपचारिक केंद्र( formal centre) माना जाता है। वि कीद्यालय में बालक के द्वारा प्राप्त शैक्षिक तथा अन्य अनुभव व्यक्तित्व के विकास में सार्थक भूमिका अदा करते हैं। विद्यालय में छात्रों को अपना शैक्षिक, नैतिक ,सामाजिक, शारीरिक, बौद्धिक, संवेगात्मक तथा मानसिक विकास करने के अवसर प्रदान किए जाते हैं जिससे वह अपने व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास कर सकें। शैक्षिक कार्यक्रम, वाद विवाद प्रतियोगिताओं, खेलकूद, अभिनय सांस्कृतिक आयोजनों में भाग लेने से अनुशासन, नेतृत्व, समूह भावनाओं, आत्म अभिव्यक्ति, स्वाभिमान जैसे गुणों का विकास संभव है।


5. जनसंचार माध्यम Mass media)-
    वर्तमान युग में जनसंचार साधनों की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। रेडियो दूरदर्शन, चलचित्र, पत्रिकाएं, समाचार पत्र, समाचार पत्र जैसे जनसंचार के साधन जीवन के सभी पक्षों को प्रभावित करते हैं। इन में वर्णित विभिन्न कथानकों, अभिनेताओं के व्यवहारों व पोशाकों रीति रिवाजों दृष्टिकोणों जीवन शैली आदि का अंधा अनुसरण करते हैं। वर्तमान समय में छात्रों की असामाजिक, हिंसक वह अलगाववादी प्रवृतियों का कारण काफी सीमा तक इन्ही जनसंचार साधनों के द्वारा प्रस्तुत साहित्य है।

6. धर्म व संस्कृति Religion and culture)-
    व्यक्ति के विकास में धर्म संस्कृति का भी योगदान रहता है प्रत्येक धर्म की अपनी कुछ मूलभूत मान्यताएं होती है। जिन्हें उस धर्म के अनुयाई दिल व दिमाग में स्वीकार करते हैं तथा उन्हीं के अनुरूप कार्य करते हैं। मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा, गिरजाघरों में जाकर सुने धार्मिक प्रवचनो का प्रभाव भी व्यक्तित्व पर पड़ता है।

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