मुर्गी पालन व्यवसाय की पूरी जानकारी Poultry farming business plan in india

Poultry farm business plan in india

 भारत की बढ़ती हुई जनसंख्या को देखते हुए भारत में रोजगार मिलना काफी कठिन हो गया है ऐसे में खुद का व्यवसाय होना कितना जरूरी है। यह आप अच्छे से जानते हैं कि आम आदमी रोजगार के लिए इधर उधर भटक कर रह जाता है। लेकिन फिर भी उसे व्यवसाय नहीं मिल पाता है।

Poultry farm ऐसा व्यवसाय है जो अपने आप में  सदाबहार है और बाजार में इसके उत्पादों की बढ़ती हुई मांग को देखकर कई क्षेत्र के लोग इस बिजनेस को कर रहे हैं।
Poultry farming business के बारे में इस पोस्ट पर आपके लिए बहुत सी जानकारियां होंगी।
और अगर आप Poultry farming business से पहले से ही जुड़े हुए हैं तो यह पोस्ट आपके लिए और भी ज्यादा अहम है क्योंकि इस पोस्ट में हम आपको मुर्गी पालन से जुड़ी हुई तमाम तकनीकी जानकारी भी देंगे जैसे- मुर्गियों में होने वाली बीमारियां तथा रोकथाम के विषय के बारे में जानकारी और मुर्गियों से मिलने वाले उत्पादों की मार्केटिंग कैसे की जाए।
➧पोल्ट्री फार्म बिजनेस की शुरुआत कैसे करें और यह रोजगार आपके लिए लाभदायक कैसे हैं।

➤मुर्गी पालन व्यवसाय क्या है (What is the poultry business)-

  मुर्गी पालन एक ऐसा बिजनेस है जिसे आप कम पूंजी थोड़ी सी जमीन और थोड़ी सी मेहनत से शुरू किया जा सकता है।
पोल्ट्री फॉर्म बिजनेस के शुरू होने के बाद आप नियमित रूप से अपनी आय में दिन प्रतिदिन बढ़ोतरी कर सकते हैं।
  बिजनेस में मुनाफा कमाने की नजर से भी बेरोजगार युवा बड़े स्तर पर Poultry farm को करके स्वरोजगार अपना सकते हैं।
पोल्ट्री फार्म बिजनेस शुरू करने से पहले आपको कुछ तैयारियां करनी पड़ेगी जैसे- मुर्गी के घर, कुछ उपकरण, मुर्गियों के लिए दाने व चारे का इंतजाम।
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➤उपयोगिता के आधार से मुर्गियां तीन प्रकार की होती है-
➧पहले प्रकार की मुर्गियां केवल मास की पैदावार के लिए जानी जाती है।
➧दूसरे प्रकार की मुर्गियां जो ज्यादा अंडा देने के लिए जानी जाती है।
➧तीसरे प्रकार की मुर्गीया अंडे और मांस दोनों के लिए उपयोगी होती है।


➤मुर्गियों की नस्लें Breeds of chickens-  -

 अगर आप मुर्गी पालन के बारे में विचार कर रहे हैं तो आपको मुर्गी की नस्लों काअच्छे से पता होना चाहिए कि किस नस्ल की मुर्गीया ज्यादा मांस व अंडे (chicken egg) देती है।
 भारत में मुर्गी या कुक्कुट की बहुत सी नस्लें पाई जाती है मुर्गी पालन व्यवसाय के लिए इनमें से ही कुछ उपयोगी होती है।
➧असेल नस्ल -
  मुख्यत उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश व राजस्थान में पाई जाती हैं। इस नस्ल की मुर्गियों का चिकन बहुत अच्छा होता है।
➧कड़कनाथ नस्लें-
  यह मूलत मध्य प्रदेश की नस्ल है। इसमें प्रोटीन की मात्रा अधिक पाई जाती है। यह काफी महंगी बिकती है। कड़कनाथ नस्ल की मुर्गियां सालाना 80 अंडे देती है।
➧ग्रामप्रिया नस्ल-
  इस नस्ल का उपयोग तंदूरी चिकन बनाने में किया जाता है। यह नस्ल साल में औसतन 210 से 225 अंडे देती है।
➧स्वरनाथ नस्ल-
  इस नस्ल की मुर्गियों को घर के आसपास आसानी से पाला जा सकता है। इस नस्ल की मुर्गीया सालाना 180- 190 अंडे देती है।
➧देवेन्द्र नस्ल -
  12 सप्ताह में इसका शारीरिक वजन अट्ठारह सौ ग्राम तक हो जाता है। इस नस्ल की मुर्गियां सालाना 200 तक अण्डे देती है।
इनके अलावा  भी भारत में कई नस्लें पाई जाती है।


➤भारत में मुर्गी पालन व्यवसाय कैसे शुरू करें Start Poultry farming business plan in india-

Poultry Farm Business करने से पहले आपको इन सभी नस्लों के बारे में जानकारी होना बहुत ही जरूरी है।
 इनके बाद आपको निम्न चरणों से गुजरना पड़ता है -जैसे -

➤मुर्गियों का रखरखाव Maintenance of Chickens in Poultry Farm

अगर आप बड़े स्तर पर मुर्गी पालन व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं तो इसके लिए आपको मुर्गियों के विषय में सभी प्रकार की जानकारी होनी चाहिए।
क्योंकि मुर्गियों को गर्मियों में विशेष प्रकार के रखरखाव की जरूरत होती है मुर्गियों में गर्मी बर्दाश्त करने की क्षमता ना के बराबर होती है। कभी-कभी गर्मियों के दिनों में यह अपने पंखों का सहारा लेती है या फिर गर्मी से निजात पाने के लिए इन्हें तेज सांसें लेने पड़ती है।
इन सब से बचने के लिए मुर्गियों को ठंडा पानी दिया जाना चाहिए।

➤मौसम के हिसाब से किस प्रकार से मुर्गियों का रखरखाव करें।
➧मुर्गियों को सुरक्षित रखने के लिए ज्यादातर 4 तरीकों का उपयोग किया जाता है।
1. खुले में रखना-
2. केज पद्धति
3. अर्धसघन
4. डीप लीटर पद्धति

➤डीप लीटर पद्धति - मध्यम वर्गीय और छोटे किसानों के लिए सबसे सटीक तरीका होता है डीप लिटर सिस्टम।
डीप लिटर सिस्टम इसलिए अच्छा है क्योंकि इसमें समय और जगह की बचत के साथ साथ मेहनत भी कम करनी पड़ती है।

➤डीप लीटर पद्धति मध्यम वर्गीय परिवार के लिए किस प्रकार से बेहतर विकल्प है मुर्गी पालन के लिए-
  डीप लीटर पद्धति सभी छोटे किसानों के लिए एक बेहतर विकल्प इसलिए है क्योंकि इसमें कम लागत से मुर्गी पालन कार्य सुचारू रूप से कर सकते हैं।
डीप सिस्टम के रूप में या बिछावन के रूप में जो लकड़ी का बुरादा होता है यह सबसे उपयुक्त होता है। बुरादे में किसी भी प्रकार की नमी नहीं होनी चाहिए।

नमी की मात्रा अधिक होने से कोक्सिडियोसिस नामक रोग होने की संभावना अधिक होती हैं।
कोक्सिडियोसिस की स्थिति में मुर्गी पालक अपने लीटर को फार्म से निकालकर थोड़ा धूप में सुखा दे और उसमें चुने की मात्रा मिला दें।

➤खुले में रखना free range system-
  फ्री रेंज सिस्टम उन किसानों के लिए उपयोगी है जो 3 से 4 मुर्गियों का पालन करते हैं क्योंकि इनके लिए खाने की कोई अलग से व्यवस्था नहीं करनी होती है।
घर के ही एक कोने में छोटा सा इनका छोटा सा घर बना देते हैं जो इनको जंगली जानवरों से बचाते है।
दिन में यह मुर्गियां बाहर घूमती हैं और घर का बचा हुआ खाना खाती हैं। इसी को ही फ्री रेंज सिस्टम कहा जाता है।
फ्री रेंज सिस्टम पद्धति में किसानों को ज्यादा खर्चा नहीं आता है।

➤केज पद्धति-
   केज पद्धति आज के परिवेश में काफी सफल और अधिक आमदनी देने वाला है।
केज बैटरी सिस्टम में शुरुआती लागत अधिक आती है लेकिन जब एक बार केज बैटरी सिस्टम हम ले लेते है तो मैनेजमेंटल लागत काफी कम हो जाती है।
 लम्बी अवधि में डीप लीटर पद्धति की अपेक्षा के इस पद्धति में ज्यादा फायदा होता है और हमें मैनेजमेंट और बीमारियों के कंट्रोल में भी ज्यादा सुविधाएं मिलती है।

➤मुर्गियों का रखरखाव{Maintenance of chickens}-

इनके अलावा मुर्गीखाना बनाने के लिए कुछ जरूरी बातें ध्यान में रखना चाहिए।
मुर्गीघर बनाने के लिए जो जगह चुनी जाए उसकी सतह है थोड़ी ऊंची होनी चाहिए।
मुर्गीघर बनाने के लिए घर में जाली युक्त खिड़कियां जरूर होनी चाहिए जिससे हवा आती-जाती रहे।
मुर्गीघर की छत एस्बस्टर, खपरैल या ताड़ के पत्तों का भी उपयोग किया जा सकता है।

➤मुर्गियों का भोजन प्रबंधन{Management of Chicken Feed}-

मुर्गियों को कैसे संतुलित आहार दिया जाना चाहिए।
अंडे देने वाली मुर्गीयो को हमेशा हरा चारा व बुझा हुए चूने का चूरा दिया जाना चाहिए।
साथ ही 6 से 8 ओंस की मात्रा में प्रति मुर्गी इन्हें पानी भी दिया जाना चाहिए।
24 घंटे के भीतर एक बड़ी मुर्गी लगभग 4 औंस तक दाने खाती है।
मुर्गियों को स्वच्छ पेयजल ही दिया जाना चाहिए।
➤ मुर्गियों को दो प्रकार का आहार खिलाना चाहिए-
          जिसमें जन्म से लेकर चोथे सप्ताह की उम्र तक प्रारंभिक आहार और 5 सप्ताह से लेकर मुर्गी के बिक्री हो जाने तक परिसजक आहार खिलाना चाहिए।
➧मुर्गियों के लिए बने आहार मार्केट में आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं।
➧अंडे देने वाली मुर्गीयों की खुराक के लिए एक अच्छा मिश्रण भी तैयार किया जाना जरूरी होता है जैसे- 100 किलोग्राम संतुलित आहार बनाने के लिए दरदरी पिसी हुई पीली मकई  25 किलो, दरदरी पिसी हुई जई 15 किलो, मूंगफली की खली 20 किलो, गेहूं का चौकर 20 किलो, चावल की कुन्नी 10 किलो, मछली का चूर्ण 5 किलो, मिश्रित खनिज चूर्ण दो किलो, सीप का चूर्ण ढाई किलो और 300 से 500 ग्राम नमक मिलाकर एक मिश्रण तैयार कर सकते हैं।
यह मिश्रण 3 औंस व 4 औंस प्रतिदिन प्रति मुर्गी की दर से दिया जाना चाहिए।
उपयुक्त अनुपात में दिया गया आहार एक संतुलित आहार {Chicken Feed} होता है।

➤एक सफल मुर्गी पालन में उत्पादकता को बरकरार रखने के लिए मुर्गियों के साथ-साथ चूज़ों की देखरेख भी बहुत जरूरी है।

➤चूज़ों का रखरखाव {Maintenance of chicks}

➧चूज़ों का पालन कैसे किया जाए-
   चूज़ों की देखभाल के साथ-साथ इनके आहार पर भी ध्यान देना जरूरी है।
यदि शुरुआती दिनों में चूज़ों की सही देखभाल नहीं की जाए तो इसकी उत्पादकता पर काफी असर पड़ता है।
व्यावसायिक नस्लों के 1 दिन के चूज़े ही मार्केट में मिल जाते हैं। 4 से 5 सप्ताह तक की उम्र तक चूजों को ठंड से बचाना सबसे अधिक जरूरी होता है। इसलिए इनका पालन-पोषण मातृ पेटी द्वारा किया जाता है।
एक मातृ पेटी में 200 से 250 चूज़ों का ही पालन करना चाहिए।
सर्दियों के दिनों में चूज़ों का खास ध्यान रखा जाना चाहिए इसलिए सर्दियों के दिनों में मातृ पेटी में एक 200 वाट का बल्ब लगा देना चाहिए।
चूज़ों को पहले सप्ताह में अधिक गर्मी की आवश्यकता होती है 95 डिग्री फॉरेनहाइट।

मुर्गियों की सही देखभाल संतुलित आहार और रखरखाव के लिए साफ-सुथरा हवादार घर के साथ ही अगर आप मुर्गी पालन करने के लिए अच्छी नस्ल का चुनाव करते हैं तो उनमें बीमारी होने की संभावना कम हो जाती है।
मुर्गी पालक के लिए बेहतर यह होगा कि आप इनमें रोग प्रतिरोधक उपायों को लागू करना पहले से ही शुरू कर दें ताकि उनमें आगे जाकर कोई भी संक्रामक बीमारी ना लगे।
किसी भी एक मुर्गी के संक्रामक होने से उसे बाकी के झुंड से अलग कर दे ताकि मुर्गी की बीमारियों के संक्रमण से दूसरी मुर्गियों में ना लग जाए।

➤मुर्गियों में होने वाली बीमारियां व इनके बचाव {Diseases and prevention of chickens}-

    मुर्गियों में वायरस जनित रोग का प्रकोप अधिक देखने को मिलता है इसका एक बार संक्रमण आपके Poultry Farm Business को काफी क्षति पहुंचा सकता है।
रोगों के बचाव के लिए आप जिस दिन चूजा लाते हैं उसके प्रथम दिन HVT नामक टीका अवश्य दें।
2 से 5 वे दिन के अंदर रानीखेत मुर्गियों F-1 टीका अवश्य दें, फिर 14वे दिन गमबोरो रोग से बचाव के लिए IVD टिके का इस्तेमाल जरूर करें।
पुनः 21 वे दिन फाउल पॉक्स रोग से बचाव के लिए 0.2Ml दवा चमड़ी के नीचे मुर्गियों को अवश्य दें।
पुनः 28 वे दिन रानीखेत रोग से बचाव के लिए f 2 टीका दे।
इनके अलावा 9वे सप्ताह व 12वे सप्ताह में भी अवश्य टीके लगवाने चाहिए।
इन सभी टीको को आप पशु चिकित्सक की देखरेख में लगवाए।

➤मुर्गियों से मिलने वाले उत्पादों की मांग मार्केट(dairy farm) में हमेशा बनी रहती है इसलिए आप बाजार में अंडे या मांस बेच कर आसानी से लाभ कमा सकते हैं।
कहीं बार ऐसा देखा जाता है कि पोल्ट्री फार्म से मार्केट (dairy farm) तक पहुंचने में ही उत्पादों का काफी हद तक नुकसान हो जाता है जिससे बचने के लिए व्यापारियों को खास तैयारी करनी चाहिए।
➤बड़े स्तर पर Poultry Farm Business को अपनाने वाले बंधुओं के सामने अंडे को लंबे समय तक सुरक्षित रखने की चुनौती होती है इसके लिए बड़े व्यवसाय रेफ्रिजरेटर या कोल्ड स्टोरेज का इस्तेमाल कर सकते हैं।
छोटे व्यवसायी अंडो को चूने के पानी मे डूबा कर तथा छांव में सुखाकर काफी दिनों तक सुरक्षित रख सकते हैं। साथ ही अंडे को तेज धूप व बारिश से बचाना चाहिए।

➤Poultry Farm Business start करने से पहले इसके आर्थिक पहलुओं को भी गौर से समझना जरूरी है।
शुरुआती दिनों में Poultry Farm Business में कितनी लागत आती है और आगे जाकर इसमें कितना मुनाफा होता है यह जाना आपके लिए बेहद जरूरी है।

➤मुर्गी पालन व्यवसाय में लागत Cost in poultry farm business-

   छोटे व मझले व्यापारी जो पोल्ट्री फार्म बिजनेस करना चाहते हैं उन्हें 500 मुर्गियों को पालने में लगने वाली लागत 30 से ₹40000 तक होती है।
500 मुर्गियों को पालने पर आप इस बिजनेस में 8 से ₹10000 महीना कमा सकते हैं।
बड़े व्यापारी पोल्ट्री फार्म बिजनेस में केज बैटरी सिस्टम से अंडे उत्पादन की इकाई स्थापित कर सकते हैं और विशेष सहायता के लिए इसका एक प्रोजेक्ट बनाकर उसको फाइनेंस करवाकर व्यवसायिक स्तर पर इसकी फार्मिंग कर सकते हैं।

➤मुर्गीपालन के लिए कितनी सब्सिडी मिलती है(poultry farm subsidy)-

Poultry farming business को सरकार बढ़ावा देने के लिए नाबार्ड व एनएनएसई द्वारा मुर्गीपालको को सब्सिडी प्रदान की जाती है इस सब्सिडी में sc व st कैटेगरी वालों को 35% और जनरल कैटेगरी वालों को 25% सब्सिडी दी जाती है।

➤कौशल skill-

     किसी भी कार्य को करने के लिए उसमे दक्षत्ता होना बहुत जरुरी होता है इसलिए आप मुर्गी पालन बिज़नेस शुरू कर  रहें है तो आपमें कुछ व्यक्तिगत कौशल होना बहुत जरुरी है
जैसे- पोल्ट्री फार्म का ज्ञान होना
मुर्गियों में होने वाली बीमारियों का ज्ञान होना
मुर्गियों के लिए अच्छे आहार का ज्ञान होना
मौसम के अनुसार मुर्गियों के रख रखाव का ज्ञान आदि

 ➤शैक्षणिक योग्यता-
Poultry farming business start करने के लिए किसी भी प्रकार की शैक्षणिक योग्यता की जरुरत नहीं पड़ती है इसके लिये आपके पास जीव विज्ञान का थोड़ा ज्ञान होना जरुरी है