14 October 2018

शिक्षा मनोविज्ञान की उपयोगिता Utility of education psychology

                     Utility of education psychology

वर्तमान युग में शिक्षा की प्राचीन अवधारणा परिवर्तित हो गई है।शिक्षा का तात्पर्य बालको को केवल सूचना देना ही नहीं है। बल्कि बालक का सर्वांगीण विकास करना है। और यह तभी संभव है जबकि शिक्षक को बाल क के बारे में पूर्ण ज्ञान हो। शिक्षा मनोविज्ञान (education psychology)बालक को समझने में शिक्षक की सहायता करता है। क्योकिं शिक्षा मनोविज्ञान में शिक्षा और सीखने संबंधी समस्याओं का अध्ययन किया जाता है।
अध्यापक की लिए शिक्षा मनोविज्ञान(education psychology) की आवश्यकता को निम्न प्रकार से स्पष्ट किया जा सकता है।


1. सामग्री का चयन तथा व्यवस्था Selection and arrangement of materials-
      शिक्षक का कार्य छात्र को नवीन ज्ञान तथा कोशल का प्रशिक्षण देना है। प्रतीक स्तर पर ज्ञान प्रदान करने के लिए अनेक विधियों को अपनाना पड़ता है। शिक्षा मनोविज्ञान (education psychology)अध्यापक को शिक्षण- सामग्री के उचित चयन तथा उसकी व्यवस्था का ज्ञान कराता है।
2. सीखने की प्रक्रिया का मार्ग दर्शन Way of learning process-
    शिक्षक को निगमन,अध्ययन, पठन,निरीक्षण,सूत्र के अनुसार अपनी पाठय सामग्री को संजोकर छात्रों के समक्ष प्रस्तुत करना पड़ता है।प्रत्येक बालक क्व सीखने का ढंग अलग होता है। टीचर को सीखने की क्रिया के मार्गदर्शन का ज्ञान शिक्षा मनोविज्ञान ही देता है।
3. मूल्यांकन Evaluation-
     अध्यापक जो भी ज्ञान देता है उसका प्रभाव तथा उस ज्ञान के कारण बालकों  में क्या व्यावहारिक परिवर्तन हुए हैं। इसकी जानकारी शिक्षा मनोविज्ञान ही देता है। मूल्यांकन के अंतर्गत कौन-कौन सी बातें काम मिली जाएं जिसे बालक का संपूर्ण रूप से मूल्यांकन हो जाए आदि की जानकारी शिक्षा मनोविज्ञान की प्रदान करता है।

एक शिक्षक के लिए शिक्षा मनोविज्ञान की उपयोगिता  Utilityof education psychology-


1.अपने आप को समझना Understanding Yourself-

    एक शिक्षक मैं अपने व्यवसाय की अनुकूल योगिताऐ है या नहीं ,उस स्वभाव,जीवन दर्शन,बुद्धि, स्तर,अपने निर्धारित मूल्य,अध्यापकों एवं अभिभावको से संबंध,व्यवहार, चारित्रिक गुण, अध्यापक योग्यता की समाज में क्या प्रक्रिया हैं। अध्यापक की आवश्यकता क्या है। आदि सभी बातों की जानकारी कराने में शिक्षा मनोविज्ञान  अध्यापक की सहायता करता है।


2. विद्यार्थियों को समझना Understanding students-


     सीखने की क्रिया में बालक के व्यक्तित्व की आवश्यकताओं का ज्ञान अध्यापक के लिए आवश्यक है। उदाहरण के लिए एक बालक जो अपने साथियों को सदैव तंग करता है,बच्चों को पीटता है। गली में रोशनी के लगे बल्बों को फोड़ता है। एक शिक्षा मनोविज्ञान में ज्ञान से ही शिक्षक के लिए समस्या है जिसका समाधान वह केवल दंड विधि से देखता है।
    प्रत्येक बालक में रुचि, सम्मान, स्वभाव,तथा बुद्धि की दृष्टि से भिन्नता पाई जाती है। इन व्यक्तिक भेदों को जानकर शिक्षक शिक्षा मनोविज्ञान के द्वारा मंदबुद्धि तथा कुशल बुद्धि बालकों में भेद कर सकता है।

3. शिक्षण पद्धति Teaching method-

     शिक्षा मनोविज्ञान(education psychology) में सीखने के ऐसे अनेक सिद्धांतो का उल्लेख किया जाता है,जिसकी सहायता से अध्यापक अपने शिक्षक की विधियों का निश्चय कर सके।


4. मूल्यांकन Evaluation-


     यह जानने के लिए किस शिक्षार्थी नये ज्ञान को प्राप्त करने योग्य है अथवा नहीं। अथार्त बालक के ज्ञान की थाह लगाने के लिए शिक्षा मनोविज्ञान की और दिखा जाता है ।

5. समस्याओं का निदान Diagnosis of problems-

     शिक्षण कार्य में अध्यापक को अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता है इन समस्याओं के निदान तथा निराकरण में शिक्षा मनोविज्ञान अध्यापक की बहुत सहायता करता है।
    ऊपर दिये गए सभी तथ्यों से स्पष्ट होता है कि एक अध्यापक को अपना शिक्षण प्रभावशाली बनाने की लिए शिक्षा मनोविज्ञान(effective education psychology) का अध्ययन बहुत आवश्यक है।

अध्यापक के लिए शिक्षा मनोविज्ञान का महत्व-

     शिक्षा मनोविज्ञान (education psychology)समाज के समक्ष दो पहलू प्रस्तुत किए हैं-सैद्धांतिक और व्यवहारिक
     शिक्षक विद्यार्थी अभिभावक सभी के लिए इसका सैद्धांतिक तथा व्यवहारिक महत्व है। आधुनिक युग में शिक्षा का आधार ही मनोविज्ञान है शिक्षा मनोविज्ञान का महत्व निम्न प्रकार से बताया जा सकता है-

शिक्षा मनोविज्ञान का महत्व Importance of education psychology-

    1. बाल केंद्रित शिक्षा Child centered education-
        अब शिक्षा बाल केंद्रित हो गई है।बालक की योगिता,क्षमता,रुचि,अभिरुचि आदि के अनुसार पाठ्यक्रम प्रशिक्षण विधियों का निर्माण किया गया है।आज का बालक गुरु के कठोर नियंत्रण से मुक्त है। पाठ्यक्रम का निर्माण बाल केंद्रित ही होता है।
    2. अनुशासन Dicipline-
        डंडे से मारपीट,एवं भय के बल पर छात्रों का सर्वांगीण विकास नहीं किया जा सकता है। अतः प्रजातांत्रिक आधार पर स्व-अनुशासन बनाए रखने पर बल दिया जाता है।
     3. शिक्षण पद्धतियों में परिवर्तन Changes in teaching methods-
         प्राचीन पद्धति में शिक्षक रटंत विधि पर बल देते थे। आज अनेक मनोवैज्ञानिक शिक्षण पद्धतियो का विकास हो गया है।जिसके अनुसार शिक्षा देने से बालक की अंतर निहित शक्तियों का विकास होता है एवं अभी भक्तिवयक्ति को माध्यम मिलता है। जिससे शिक्षा रुचिकर व आनंदमई बनाई जा सकती है।
    4. पाठ्यक्रम syllabus-

        डेनिस ने शिक्षा मनोविज्ञान का महत्व (importance of education psychology)बताते हुए कहा कि "शिक्षा मनोविज्ञान ने शिक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। अनेक मनोवैज्ञानिक परीक्षण से ज्ञात छात्रों की क्षमता तथा व्यक्तिगत भेद,इनसे छात्रों के ज्ञान, विकास तथा परिपक्वता को समझाने में भी योगदान दिया है।
    5. सीखने की प्रक्रिया का ज्ञान Knowledge of learning process-
         शिक्षा मनोविज्ञान शिक्षको को अधिगम के नियमों से अवगत कराता है जिससे शिक्षक अधिक प्रखर हो जाता है उसका आत्मविश्वास बढ़ता है।
    6. व्यक्तिगत भिन्नता Personal variation-
          छात्र मैं व्यक्तिगत विभिन्नताएं पाई जाती है। कोई भी बालक अपनी सोचने की क्षमता तथा समझ में एक समान नहीं होता। सभी की यह योग्यता अलग-अलग होती है। मनोविज्ञान का आधार व्यक्ति है। मनोविज्ञान के अनुसार बालको की रूचि,क्षमताओ,वअभिरुचियो में भिन्नता होती है।
   7. बालक के विकास की विभिन्न अवस्थाएं Different stages of development-
        बालको के विकास की विभिन्न अवस्थाओं की अलग-अलग विशेषताएं होती है। अतः उनके लिए शिक्षक पद्धतियॉ भी अलग-अलग होनी चाहिए।
    8. पाठ्य सहगामी क्रियाऐ co-operative actions-
        शिक्षा मनोविज्ञान के विकास के कारण पाठ्यक्रम में अनेक महत्वपूर्ण पाठ्य सहगामी क्रियाएं जेसे-वाद विवाद प्रतियोगिता,कहानी, अंताक्षरी,निबंध,लेखन,स्काउट, नाटक, खेलकूद, संगीत,अभिनय, आदि को स्थान देने के कारण बालको के सर्वांगीण विकास में बहुत सहयोग मिला है। इन्हें विद्यालय कार्यक्रम का अभिन्न अंग मान लिया गया है।
     9. वातावरण The atmosphere-
         शुद्ध या स्वच्छ वातावरण छात्रों में विषय सीखने की अधिक रुचि उत्पन्न करता है। बालको का शारीरिक एवं मानसिक विकास बना रहे,और साथ ही बालक भय और तनाव से दूर रहे।
     10. मापन एवं मूल्यांकन Measurement and Evaluation-
          मापन एवं मूल्यांकन की विधियों के माध्यम से यह प्रयास किया जाता है कि बालक की योग्यताओं का सही-सही मापन हो एवं उसके द्वारा की गई प्रगति का मूल्यांकन भी सही ज्ञात हो सके।
      11. अनुसंधान The research-
           नवीन अनुसंधान अध्यापक को नवीनतम शिक्षण विधियों का परिचय कराते हैं। इन विधियों के माध्यम से वह बालक का सर्वांगीण विकास करते हैं।इसमें शिक्षा मनोविज्ञान(important role in education psychology) का काफी महत्वपूर्ण योगदान है।

     12. संवेगात्मक क्रियाएं Sensational actions-
           शिक्षा मनोविज्ञान में यह जानकरी कि जाती है कि बालको में थकान क्यों होती है,उनकी शारीरिक वह मानसिक थकान किसी प्रकार दूर की जा सकती है। भय,, क्रोध और हर्ष आदि का अध्ययन कर के यह प्रयास किया जाता है कि बालक संतुलित ढंग से विकसित हो और अच्छा व्यवहार करें।
     13. प्रेरणा-Inspiration
          शिक्षा मनोविज्ञान (education psychology)में बालक के व्यवहार को समझने के लिए प्रेरणा एवं मूल प्रवृत्तियो के अध्ययन का बहुत महत्व है,जिससे यह पता चलता है कि किसी प्रकार का व्यवहार बालक क्यों करता है,उनकी कौन-कौन सी आवश्यकताएं है।
उपर्युक्त विवेचन की आधार पर स्किनर के शब्दों में कहां जा सकता है की "शिक्षा मनोविज्ञान(education psychology) में वै सब व्यवहार तथा व्यक्तित्व सम्मिलित है जिनका संबंध शिक्षा से है।"